नई दिल्ली. कर्नाटक की राजनीति में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान अब सतह पर आ गई है। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद से ही नेतृत्व को लेकर संशय बना हुआ था, लेकिन अब इस विवाद ने एक नया और दिलचस्प मोड़ ले लिया है। ताजा घटनाक्रम और पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दरमैया की कुर्सी को फिलहाल कोई खतरा नहीं दिखाई दे रहा है। आंकड़ों और समीकरणों के लिहाज से सिद्दरमैया अपने प्रतिद्वंद्वी डीके शिवकुमार पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं।
पार्टी के भीतर शक्ति परीक्षण की बात करें तो सिद्दरमैया की स्थिति बेहद मजबूत है। कांग्रेस के पास कुल 137 विधायक हैं, और सूत्रों का दावा है कि इनमें से 100 से ज्यादा विधायकों का सीधा और मजबूत समर्थन सिद्दरमैया को प्राप्त है। इसके अलावा सिद्दरमैया की पकड़ अहिंदा समुदाय पर बहुत गहरी है और वे एक बड़े ओबीसी नेता के तौर पर स्थापित हैं। विधायकों के इतने बड़े बहुमत और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए उनकी सहमति के बिना नेतृत्व परिवर्तन करना आलाकमान के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा।
दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनका खेमा शांत बैठने को तैयार नहीं है। शिवकुमार की तरफ से लगातार दबाव बनाया जा रहा है। पिछले हफ्ते ही उन्होंने दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सामने अपनी बात रखी थी। शिवकुमार खेमे का मानना है कि कैबिनेट में फेरबदल में देरी हो रही है, जबकि सिद्दरमैया चाहते हैं कि यह फेरबदल उनके मुख्यमंत्री बने रहने की मंशा का संकेत दे। हालांकि, डीके शिवकुमार की राह में सबसे बड़ा रोड़ा विधायकों के आंतरिक समर्थन की कमी है। भले ही उन्हें प्रभावशाली वोक्कालिगा समुदाय का समर्थन हासिल है, जिनके वोटों ने जीत में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन फिलहाल यह समर्थन उनकी सीएम बनने की महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं दिख रहा है।
कांग्रेस आलाकमान इस पूरे विवाद को लेकर सतर्क है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राहुल गांधी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि 8 दिसंबर से शुरू होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले इस विवाद को सुलझा लिया जाए। खरगे को इस बात की चिंता सता रही है कि अगर यह कलह जारी रही तो भाजपा इसका फायदा उठा सकती है और पार्टी दो फाड़ हो सकती है। ऐसे में कांग्रेस को उन राज्यों से भी हाथ धोना पड़ सकता है जहां उसकी पूर्ण बहुमत की सरकार है।
विपक्ष भी इस मौके को भुनाने में लगा है। कर्नाटक भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील कुमार ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना की पुष्टि कर दी है। भाजपा का आरोप है कि सरकार में तालमेल नहीं है; सिद्दरमैया मैसूर तक सीमित हैं तो शिवकुमार दिल्ली दौड़ने में व्यस्त हैं। भाजपा नेता बी.वाई. विजयेंद्र ने भी कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी जनता का विश्वास खो चुकी है।
दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग भी इशारों में चल रही है। गुरुवार को शिवकुमार ने ‘शब्द शक्ति’ को ‘विश्व शक्ति’ बताया था, जिसके जवाब में सिद्दरमैया ने सोशल मीडिया पर पलटवार करते हुए लिखा कि कोई भी शब्द तब तक शक्ति नहीं है जब तक वह लोगों के लिए दुनिया को बेहतर न बनाए। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि सिद्दरमैया, जो सबसे लंबे समय तक सीएम रहने का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं, पद छोड़ने को राजी नहीं हैं, और शिवकुमार को अपने भविष्य के लिए एक ठोस आश्वासन चाहिए।
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