पिथौरागढ़। उत्तराखंड में सीमांत क्षेत्रों को साहसिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को पिथौरागढ़ जिले के गुंजी में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 में प्रतिभाग किया। उन्होंने 70 किलोमीटर और 42 किलोमीटर की दौड़ के विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया और देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे धावकों का उत्साह बढ़ाया। गुंजी पहुंचने पर रं समुदाय के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा पहनाकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि कैलाश परिक्रमा रन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि साहस, संकल्प, आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति की कठिन परीक्षा है। ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में चुनौतीपूर्ण रास्तों, प्रतिकूल मौसम और कम ऑक्सीजन के बीच दौड़ पूरी करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।
सेना और सुरक्षा बलों के योगदान की सराहना
मुख्यमंत्री ने आयोजन को सफल बनाने में भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने इन बलों के अधिकारियों और जवानों को सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा बल कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ क्षेत्र में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भी अहम योगदान देते हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन के पहले संस्करण में 700 से अधिक धावकों ने हिस्सा लिया था। इस आयोजन से आदि कैलाश क्षेत्र को साहसिक पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान मिली है। मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष क्षेत्र के लिए जारी इनर लाइन परमिट की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बीच इस क्षेत्र के बढ़ते आकर्षण को दर्शाता है।
स्थानीय लोगों को मिल रहे रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत गांवों को देश के अंतिम गांवों के बजाय प्रथम गांवों के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि स्थानीय निवासियों को रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर मिल सकें।
उन्होंने कहा कि आदि कैलाश परिक्रमा रन जैसे आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं। इनसे होमस्टे संचालकों, गाइडों, परिवहन कारोबारियों, होटल संचालकों और खानपान से जुड़े लोगों को लाभ मिलता है। सरकार का प्रयास है कि पर्यटन से होने वाली आर्थिक गतिविधियों का फायदा सीधे स्थानीय समुदायों तक पहुंचे और सीमांत क्षेत्रों से पलायन कम करने में मदद मिले।
धामी ने बताया कि उत्तराखंड में ट्रेकिंग, पर्वतारोहण, रिवर राफ्टिंग, कयाकिंग, पैराग्लाइडिंग, माउंटेन साइक्लिंग और एंगलिंग जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। नीति घाटी में भी इस वर्ष अल्ट्रा रन आयोजित की गई। औली, मुनस्यारी, ऋषिकेश और टिहरी जैसे क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन के विस्तार की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
मई 2027 में होगी 100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अगले वर्ष मई के पहले सप्ताह में ‘100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन’ आयोजित की जाएगी। प्रस्तावित दौड़ लगभग 5,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माणा पास से शुरू होकर बदरीनाथ और जोशीमठ होते हुए औली तक पहुंचेगी।
उन्होंने कहा कि इस आयोजन से देश-विदेश के धावकों को उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और हिमालयी क्षेत्र की विशेषताओं को जानने का अवसर मिलेगा। साथ ही, सीमांत इलाकों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं। कार्यक्रम में पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी, जनजाति सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष अशोक सिंह नबियाल, सुरक्षा बलों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।