बेंगलुरु। कर्नाटक हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया अकाउंट ‘कर्नाटक पोर्टफोलियो’ के एडमिन संदीप कुमार के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद कर दिया है। कुमार पर पुत्तूर में छह युवकों द्वारा एक महिला को चाकू दिखाकर धमकाने की घटना से संबंधित खबर को दोबारा पोस्ट करने का आरोप था। अदालत ने कहा कि शिकायत और सोशल मीडिया पोस्ट में ऐसे पर्याप्त तत्व नहीं हैं, जिनसे समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाने के इरादे से झूठी जानकारी प्रसारित करने का अपराध बनता हो।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने कुमार की याचिका पर सुनवाई के बाद 16 अक्टूबर को यह आदेश दिया। अदालत ने मामले में एफआईआर रद करने के साथ सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर आपराधिक मुकदमे दर्ज करने, एक ही घटना से संबंधित कई शिकायतों और पुलिस की शक्तियों के इस्तेमाल के संबंध में दिशा-निर्देश भी जारी किए।
एक घटना पर कई एफआईआर दर्ज करने पर टिप्पणी
अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया से जुड़े मामलों में पुलिस को यह देखना चाहिए कि कथित अपराध के लिए जरूरी कानूनी तत्व मौजूद हैं या नहीं। एक ही घटना को लेकर अलग-अलग लोगों की शिकायतें मिलने पर उनकी सावधानीपूर्वक जांच की जानी चाहिए। केवल शिकायतकर्ता अलग होने के आधार पर बार-बार एफआईआर दर्ज नहीं की जानी चाहिए, जब तक कि किसी अलग अपराध के सामने आने के आधार न हों।
हाई कोर्ट ने कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक को इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कुमार की ओर से अधिवक्ता गिरीश भारद्वाज ने अदालत में पक्ष रखा।
घटना गंभीर थी, लेकिन पोस्ट से सांप्रदायिक मंशा साबित नहीं
अदालत ने टिप्पणी की कि कुमार ने जिस घटना से जुड़ी खबर साझा की थी, वह कोई काल्पनिक या मनगढ़ंत घटना नहीं थी। मामला छह युवकों द्वारा कथित तौर पर समूह बनाकर थार एसयूवी से एक महिला का पीछा करने और उसे बार-बार धमकाने से संबंधित था।
अदालत के मुताबिक, कुमार की पोस्ट में ‘कानून-व्यवस्था सवालों के घेरे में’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। पोस्ट और शिकायत में किसी धार्मिक समुदाय का नाम नहीं लिया गया था। अदालत को ऐसा कोई संकेत भी नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि पोस्ट का उद्देश्य सांप्रदायिक तनाव पैदा करना था।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इसी घटना के संबंध में संबंधित पुलिस थाने में सात मामले दर्ज किए गए थे। उसने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाने से संबंधित अपराध साबित करने के लिए उसके आवश्यक कानूनी तत्वों, जिसमें जरूरी इरादा भी शामिल है, की मौजूदगी देखना आवश्यक है। इस संदर्भ में अदालत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक संरक्षण पर भी जोर दिया।
गिरफ्तारी से पहले कानूनी प्रावधानों का पालन जरूरी
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी मामले में आपराधिक कार्रवाई शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी को तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाए। पुलिस को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 35 के तहत निर्धारित सुरक्षा उपायों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
अदालत ने संदीप कुमार की याचिका स्वीकार करते हुए पुत्तूर पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर रद कर दी। साथ ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन कराएं। फैसले में सोशल मीडिया पर सामग्री साझा करने से जुड़े मामलों में आरोपों की कानूनी जांच और पुलिस कार्रवाई में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया गया।