देहरादून। मुख्य सेवक सदन में शनिवार को आयोजित मातृशक्ति संवाद एवं सम्मान समारोह में महिलाओं ने केंद्र और राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं पर आधारित गीत प्रस्तुत किए। महिलाओं ने स्वत:स्फूर्त रूप से गीतों के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए और योजनाओं से मिले लाभ तथा महिलाओं के जीवन में आए बदलाव को सामने रखा।
कार्यक्रम के दौरान उस समय भावपूर्ण माहौल बन गया, जब एक महिला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक अपनी बात पहुंचाने की इच्छा जताई और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने गीत प्रस्तुत किया। गीत के माध्यम से उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की ओर से महिलाओं के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख किया और इनके प्रति अपना आभार व्यक्त किया।
महिला ने अपने गीत में बिना ब्याज ऋण, लखपति दीदी योजना और महिला स्वयं सहायता समूहों के गठन जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं के कारण महिलाओं को आर्थिक रूप से आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। गीत के जरिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति स्नेह और आभार भी व्यक्त किया।
कार्यक्रम में प्रस्तुत गीत केवल योजनाओं की जानकारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और बदलती भूमिका की झलक भी इसमें दिखाई दी। महिलाओं ने अपने गीतों के माध्यम से उस बदलाव को स्वर दिया, जिसमें महिलाएं सरकारी योजनाओं की केवल लाभार्थी बनने के बजाय आत्मनिर्भरता और विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार के रूप में आगे बढ़ रही हैं।
संवाद में महिलाओं की भागीदारी ने कार्यक्रम को सहज और भावनात्मक रूप दिया। स्वत:स्फूर्त प्रस्तुति के माध्यम से महिलाओं ने अपने अनुभव और भावनाएं साझा कीं। गीत में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से महिला हित में संचालित योजनाओं का उल्लेख करते हुए यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि इन पहलों से महिलाओं के लिए आर्थिक गतिविधियों और आत्मनिर्भरता के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
महिलाओं ने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सामूहिक रूप से आगे बढ़ने और स्वरोजगार के अवसर तलाशने की बात भी गीत के जरिए सामने रखी। इस दौरान महिला सशक्तिकरण को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की व्यापक सोच से जोड़कर देखा गया।
कार्यक्रम में महिलाओं की ओर से व्यक्त भावनाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रति विश्वास तथा योजनाओं के प्रति आभार की अभिव्यक्ति दिखाई दी। गीतों के माध्यम से महिलाओं ने अपने अनुभवों और अपेक्षाओं को सरल एवं प्रभावी तरीके से सामने रखा।
मातृशक्ति संवाद एवं सम्मान समारोह में हुई यह प्रस्तुति कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में रही। महिलाओं ने गीतों के जरिए यह रेखांकित किया कि वे अब केवल योजनाओं का लाभ लेने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि परिवार, समाज और आर्थिक गतिविधियों में अपनी भूमिका को मजबूत करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
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