शिमला। हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में डेपुटेशन पर कार्यरत करीब 500 शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारियों के सामने अब वेतन को लेकर परेशानी खड़ी हो सकती है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद विभाग में डेपुटेशन व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ गई है। इन कर्मचारियों में बड़ी संख्या शिक्षकों की बताई गई है, जो नियमित रूप से स्कूलों में पढ़ाने के बजाय शिक्षा निदेशालय, उपनिदेशालयों और अन्य कार्यालयों में डेपुटेशन पर सेवाएं दे रहे हैं। गैर शिक्षक कर्मचारियों की संख्या इसके मुकाबले कम है।
विभाग में लंबे समय से यह व्यवस्था चर्चा में रही है कि दुर्गम क्षेत्रों में तबादला होने के बाद कुछ शिक्षक वहां कार्यभार संभालने के बजाय शहरों के आसपास के स्कूलों, शिक्षा कार्यालयों या खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी यानी बीईईओ कार्यालयों में डेपुटेशन हासिल कर लेते हैं। मूल रूप से अस्थायी मानी जाने वाली यह व्यवस्था कई मामलों में लंबे समय तक जारी रहती है। इसका असर उन स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता पर पड़ता है, जहां उनकी मूल तैनाती होती है।
डीडीओ की जवाबदेही तय
हाई कोर्ट ने डेपुटेशन व्यवस्था को लेकर ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग आफिसर यानी डीडीओ की जिम्मेदारी स्पष्ट कर दी है। अब वेतन बिल तैयार और प्रस्तुत करते समय डीडीओ को यह प्रमाणित करना होगा कि संबंधित कर्मचारी ने उस महीने वास्तव में उसी स्टेशन पर काम किया है, जहां से उसका वेतन तैयार किया जा रहा है।
अदालत के निर्देशों के अनुसार प्रमाणन के बिना वेतन बिल पास नहीं किया जाएगा। यदि किसी मामले में गलत प्रमाणन किया जाता है तो संबंधित डीडीओ के साथ ट्रेजरी अधिकारी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होंगे। इसके अलावा कर्मचारी की सर्विस बुक में दूसरी जगह तैनाती या डेपुटेशन से संबंधित पूरा विवरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
एक जगह ड्यूटी, दूसरी जगह से वेतन पर निगरानी
डेपुटेशन से जुड़े मामलों में एक प्रमुख समस्या यह बताई गई है कि कर्मचारी किसी अन्य स्थान पर काम करता है, जबकि उसका वेतन किसी दूसरे स्टेशन से जारी होता रहता है। कुछ मामलों में डेपुटेशन या दूसरी जगह समायोजन होने के बावजूद सर्विस रिकॉर्ड में इसकी जानकारी दर्ज नहीं की जाती।
दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती से बचने के लिए डेपुटेशन का इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें शिक्षा विभाग के अलावा स्वास्थ्य विभाग में भी सामने आती रही हैं। हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब इस बात की जांच और प्रमाणन महत्वपूर्ण होगा कि कर्मचारी जिस स्थान से वेतन प्राप्त कर रहा है, वह वास्तव में उसी स्टेशन पर ड्यूटी कर रहा है या नहीं।
नई व्यवस्था के तहत इस संबंध में प्रमाण वेतन बिल के साथ देना होगा। इससे डेपुटेशन पर कर्मचारियों की तैनाती और उनके वेतन भुगतान के रिकॉर्ड के बीच तालमेल सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी। आदेश लागू होने के बाद शिक्षा विभाग में लंबे समय से चल रही डेपुटेशन व्यवस्था और उससे जुड़े रिकॉर्ड की निगरानी पहले की तुलना में अधिक सख्त होने की संभावना है।
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