चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोलते हुए केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में जिस पार्टी का कोई राजनीतिक आधार नहीं है, वह अपने विरोधियों को बदनाम करने और उन्हें दबाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई जैसी संस्थाओं का सहारा ले रही है। मान ने स्पष्ट किया कि विपक्षी नेताओं को डराने और उनकी आवाज कुचलने की भाजपा की यह रणनीति लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।
सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह से राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित केंद्र सरकार का एकमात्र उद्देश्य विपक्षी दलों के नेतृत्व को अस्थिर करना है। उन्होंने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं को जेल में डाल दिया गया था ताकि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके।
भ्रष्ट नेताओं से ईमानदारी के प्रमाण की जरूरत नहीं
मुख्यमंत्री ने उन नेताओं पर भी निशाना साधा जो वर्तमान में सरकार से जवाबदेही मांग रहे हैं। मान ने कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक पंजाब के संसाधनों को लूटा और राज्य को कंगाली की कगार पर पहुंचाया, उन्हें आज उनसे सवाल पूछने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि उन्हें उन लोगों से ईमानदारी का कोई ‘सर्टिफिकेट’ नहीं चाहिए जिनके हाथ पंजाब की जनता की लूट से रंगे हुए हैं। मान के अनुसार, भाजपा के पास सरकार के खिलाफ बोलने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वे बेबुनियाद बातों और केंद्रीय एजेंसियों के डर के जरिए सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन धमकियों और दबाव की राजनीति से उनका हौसला नहीं टूटेगा। उन्होंने दोहराया कि आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब के लोगों के कल्याण और राज्य के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहेगी और किसी भी केंद्रीय एजेंसी का दबाव उन्हें उनके पथ से विचलित नहीं कर पाएगा।
प्रशासनिक और मानवीय मुद्दों पर मुख्यमंत्री का रुख
राज्य के अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने निम्नलिखित जानकारियां साझा कीं:
| विषय | मुख्यमंत्री का बयान / कार्रवाई |
| बाढ़ और जलस्तर | सरकार नदियों और बांधों के पानी पर लगातार नजर रख रही है। जनता को घबराने की जरूरत नहीं है, स्थिति नियंत्रण में है। |
| जगतार सिंह हवारा | मानवीय आधार पर अपनी बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल मिलनी चाहिए। यह विषय राज्यपाल के समक्ष उठाया गया है। |
| अंतिम निर्णय | हवारा की पैरोल पर अंतिम फैसला भारत सरकार को लेना है। |
नदियों के बढ़ते जलस्तर को लेकर मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता को आश्वस्त किया कि प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। वहीं, जेल में बंद जगतार सिंह हवारा की पैरोल के मुद्दे पर उन्होंने इसे एक मानवीय विषय करार दिया। मान ने कहा कि एक बेटे को उसकी बीमार मां से मिलने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में राज्यपाल से भी मुलाकात की है, लेकिन चूंकि मामला गंभीर श्रेणी का है, इसलिए अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार जनहित और मानवीय मूल्यों के आधार पर ही निर्णय ले रही है।
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