देहरादून, 14 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूतों को याद करने की कड़ी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक भावुक पहल की है। 15 अगस्त की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री देहरादून के भाऊवाला स्थित शहीद अमित कुमार अणथ्वाल के निवास पर पहुंचे। वहां उन्होंने शहीद के पिता नागेंद्र प्रसाद अणथ्वाल और परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। इस दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल वीर सपूत के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए, बल्कि शहीद के परिजनों को सम्मानित कर समाज में उनके सर्वोच्च स्थान को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि आजादी का यह पर्व उन बलिदानों की नींव पर खड़ा है, जो अमित कुमार अणथ्वाल जैसे वीरों ने अपनी मातृभूमि के लिए दिए हैं। उन्होंने कहा कि शहीद के परिजनों का सम्मान करना पूरे राष्ट्र और समाज का गौरव बढ़ाने जैसा है। राज्य सरकार शहीदों के परिवारों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उनके हर सुख-दुख में उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
वीरता की मिसाल रहे अमित अणथ्वाल
पौड़ी गढ़वाल के कल्जीखाल विकासखंड के ग्राम क्वाला से संबंध रखने वाले अमित कुमार अणथ्वाल का सैन्य सफर शौर्य और पराक्रम से भरा रहा। वे 9 दिसंबर 2011 को गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुए थे। अपनी असाधारण कार्यकुशलता के कारण उन्हें भारतीय सेना की सबसे घातक यूनिट ‘4 पैरा स्पेशल फोर्स’ में सेवा देने का अवसर मिला। उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के अशांत कुपवाड़ा क्षेत्र में थी, जहाँ उन्होंने सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और आतंकवाद के विरुद्ध कई सफल अभियानों में हिस्सा लिया।
| शहीद अमित कुमार अणथ्वाल: शौर्य गाथा |
| • भर्ती: 9 दिसंबर 2011 (गढ़वाल राइफल्स) |
| • इकाई: 4 पैरा स्पेशल फोर्स (Special Forces) |
| • ऐतिहासिक मुठभेड़: अप्रैल 2020, केरन सेक्टर (कुपवाड़ा) |
| • पराक्रम: अकेले और अपने साथियों के साथ मिलकर 5 खूंखार आतंकियों को ढेर किया। |
| • सर्वोच्च बलिदान: मातृभूमि की रक्षा करते हुए मुठभेड़ में वीरगति प्राप्त की। |
| • सम्मान: अदम्य साहस के लिए मरणोपरांत ‘सेना मेडल’ से अलंकृत। |
वो ऐतिहासिक मुठभेड़ और शहादत
अप्रैल 2020 में उत्तरी कश्मीर के केरन सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास आतंकियों के एक बड़े समूह ने घुसपैठ की कोशिश की थी। अमित कुमार अणथ्वाल और उनकी टीम को इन्हें रोकने की जिम्मेदारी दी गई। भीषण बर्फबारी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच चली इस मुठभेड़ में अमित ने अदम्य साहस का परिचय दिया। आतंकियों की अंधाधुंध फायरिंग के बावजूद वे पीछे नहीं हटे और अपनी जान की परवाह किए बिना पांच आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। इस भीषण युद्ध में अमित सहित पांच वीर जवानों ने देश की सुरक्षा के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। उनके इसी पराक्रम के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत ‘सेना मेडल’ से सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने शहीद के पिता से बातचीत करते हुए कहा कि उत्तराखंड की यह भूमि ‘वीरप्रसवा’ है, जिसने देश को अमित जैसे हजारों योद्धा दिए हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि शहीद की स्मृतियों को संजोने और उनके गांव व क्षेत्र के विकास के लिए सरकार निरंतर कार्य करेगी। धामी ने कहा कि अमित का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा बनेगा। मुख्यमंत्री की इस यात्रा से शहीद के परिवार ने स्वयं को गौरवान्वित महसूस किया और सरकार की संवेदनशीलता के प्रति आभार जताया। इस कार्यक्रम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि और सेना के कुछ पूर्व अधिकारी भी मौजूद रहे।
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