चंडीगढ़, 6 अगस्त। पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन अवैध खनन का मुद्दा गरमाने से सदन में भारी शोर-शराबा और तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष ने राज्य में अवैध खनन की जांच के लिए विधानसभा की विशेष कमेटी गठित करने की मांग उठाई, जिसे सरकार द्वारा स्वीकार न किए जाने पर कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए, वहीं सरकार ने भाखड़ा बांध की सुरक्षा और राज्य में मिल रहे नए खनिज संसाधनों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने अवैध खनन का मामला उठाते हुए कहा कि जमीनी हकीकत जानने के लिए एक निष्पक्ष कमेटी का गठन अनिवार्य है। कांग्रेस विधायक दल ने इस मांग का समर्थन किया, लेकिन जब सरकार की ओर से इस पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो विपक्षी सदस्य सदन से बाहर चले गए।
भाखड़ा बांध की सुरक्षा पर सरकार का स्पष्टीकरण
खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने भाजपा विधायक अश्विनी शर्मा और अन्य सदस्यों के सवालों का जवाब देते हुए भाखड़ा बांध को लेकर फैली अफवाहों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि बांध के झुकने की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांध की इंजीनियरिंग ऐसी है कि पानी के भारी दबाव में इसमें मामूली झुकाव आना एक स्वाभाविक तकनीकी प्रक्रिया है। जैसे ही पानी का दबाव कम होता है, बांध अपनी मूल स्थिति में वापस आ जाता है। उन्होंने बताया कि 1995 से 2025 के बीच ऐसा 15 बार हो चुका है और बांध पूरी तरह सुरक्षित है।
राजस्व और खनिज संपदा पर बहस
बरिंदर गोयल ने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण किया है, जिसके कारण राज्य के राजस्व में भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के समय खनन से मात्र 120 करोड़ रुपये मिलते थे, जो अब बढ़कर 825 करोड़ रुपये हो गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में पोटाश के भंडार की तलाश के लिए 10 स्थानों पर ड्रिलिंग शुरू कर दी गई है। यदि पोटाश का व्यावसायिक भंडार मिलता है, तो यह पंजाब की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
विपक्ष के आरोप और वित्त मंत्री का पलटवार
भाजपा विधायक अश्विनी शर्मा ने सरकार पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि अवैध खनन के खिलाफ बोलने वालों को सत्ता पक्ष के बड़े नेताओं द्वारा धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने सरकार के 20 हजार करोड़ के राजस्व के दावे पर भी सवाल उठाए। वहीं, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि भाजपा विधायक राज्य के मुद्दों पर बोलने के बजाय केंद्र से पंजाब का वैधानिक हिस्सा दिलाने में मदद करें। चीमा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब के साथ वित्तीय भेदभाव कर रही है और राज्य का बकाया फंड जारी नहीं कर रही है।
चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने पोटाश भंडार की खोज का स्वागत किया, लेकिन सरकार से इसकी वायबिलिटी रिपोर्ट सदन में रखने की मांग की। सदन में काफी देर तक चली इस खींचतान के बाद कांग्रेस सदस्यों के वॉकआउट के साथ कार्यवाही में गतिरोध बना रहा। सरकार ने स्पष्ट किया कि वह राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और पारदर्शी खनन व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है।