चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन एथेनॉल और ई-20 पेट्रोल (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) के मुद्दे पर सदन में भारी हंगामा और तीखी बहस देखने को मिली। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया। जहाँ सरकार ने इस नीति को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए, वहीं विपक्षी दलों ने राज्य सरकार की अपनी नीतियों को आड़े हाथों लिया। बहस के दौरान व्यक्तिगत छींटाकशी भी हुई, जिससे सदन का माहौल काफी गरमा गया।
राणा गुरजीत सिंह का पलटवार: “मैं कर्मयोगी हूँ, लुटेरा नहीं”
बहस के दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बिना किसी का नाम लिए टिप्पणी की कि एथेनॉल बनाने वाले उद्योगपति भी इसी सदन में बैठे हैं। इस पर कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने तत्काल और कड़ा एतराज जताया। उन्होंने स्वाभिमान के साथ जवाब देते हुए कहा, “मैं कर्मयोगी हूँ, लुटेरा नहीं।” राणा गुरजीत ने तर्क दिया कि एथेनॉल उद्योग ने पंजाब के किसानों की मदद की है और इसी के कारण मक्की के दाम बेहतर हुए हैं। उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि यदि सरकार को लगता है कि यह उद्योग गलत है, तो इसे कल सुबह ही बंद कर देना चाहिए।
ई-20 पेट्रोल से 30 करोड़ वाहनों पर संकट का दावा
कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह ने इस मुद्दे को और अधिक हवा देते हुए दावा किया कि ई-20 पेट्रोल नीति से देश के लगभग 30 करोड़ वाहन प्रभावित होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में दोपहिया और कारें शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमेरिकी दबाव में आकर अरबों डॉलर का एथेनॉल आयात करने की योजना बना रही है। मंत्री ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के परिवार से जुड़ी कंपनियों का भी उल्लेख किया और कहा कि एथेनॉल फैक्ट्रियों के कारण स्थानीय प्रदूषण बढ़ रहा है। उनके इन आरोपों पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया और इसे राजनीति से प्रेरित बताया।
पेट्रोल के दाम और वैट पर घिरी सरकार
कांग्रेस विधायक अवतार सिंह जूनियर ने सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रस्ताव की भावना ठीक हो सकती है, लेकिन पंजाब सरकार का दोहरा रवैया सामने आ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र ने पेट्रोल पर वैट कम किया, तो पंजाब सरकार ने इसे दो बार क्यों बढ़ाया? उन्होंने मांग की कि यदि राज्य सरकार वास्तव में जनता का हित चाहती है, तो उसे तुरंत पेट्रोल की कीमतों में कटौती करनी चाहिए। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने एथेनॉल का बचाव करते हुए कहा कि इसका उपयोग दवाओं के निर्माण में भी होता है, इसलिए इसे पूरी तरह गलत नहीं ठहराया जा सकता।
वाहनों की सुरक्षा और मुआवजे की मांग
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में प्रस्ताव रखते हुए मांग की कि जिन पुराने वाहनों को ई-20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं बनाया गया है, उनके इंजन पर पड़ने वाले प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन होना चाहिए। सरकार का प्रस्ताव है कि वाहन मालिकों को एथेनॉल-मुक्त पेट्रोल का विकल्प दिया जाए। साथ ही, यदि इस नए ईंधन की वजह से किसी भी वाहन में तकनीकी खराबी आती है, तो सरकार या पेट्रोलियम कंपनियों को मुआवजे का प्रावधान करना चाहिए। सदन ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव की प्रति केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय लिया है।
महत्वपूर्ण विधेयकों और रिपोर्टों पर चर्चा
हंगामे के बीच सरकार ने सदन के पटल पर विभिन्न विभागों की वार्षिक रिपोर्ट और लेखा विवरण भी रखे। इनमें पंजाब स्टेट कंटेनर एंड वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और पीआरटीसी से जुड़ी रिपोर्ट शामिल रहीं। विधायी कार्य के तहत ‘पंजाब कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर (रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस) संशोधन विधेयक, 2026’ को सदन में विचारार्थ प्रस्तुत किया गया। इससे पहले, प्रश्नकाल के दौरान स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों और हालिया पेपर लीक मामलों को लेकर भी विपक्ष ने शिक्षा व स्वास्थ्य मंत्रियों के इस्तीफे की मांग दोहराई, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।