लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने अवैध खनन और खनिजों के गैर-कानूनी परिवहन को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए एक आधुनिक और अभेद्य सुरक्षा चक्र तैयार किया है। सरकार ने इसके लिए ‘एकीकृत खनन निगरानी तंत्र’ (आईएमएसएस) को अत्यधिक सुदृढ़ बनाया है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं। इस हाई-टेक प्रणाली के माध्यम से न केवल अवैध गतिविधियों पर 24 घंटे पैनी नजर रखी जा रही है, बल्कि प्रदेश में पारदर्शिता बढ़ने के साथ-साथ राजस्व संरक्षण को भी नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया गया है। सरकारी सख्ती और तकनीक के इस मेल से भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने अब तक 756 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व वसूलने में बड़ी सफलता हासिल की है।
खनन क्षेत्रों की डिजिटल घेराबंदी और निगरानी तंत्र
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव ने इस आधुनिक प्रणाली की कार्यप्रणाली के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि आईएमएसएस के तहत प्रदेश के सभी प्रमुख खनन क्षेत्रों की ‘जियो-फेंसिंग’ की गई है, जिससे यह पता चलता है कि खनन कार्य निर्धारित सीमा के भीतर ही हो रहा है। इसके अलावा, खनन स्थलों पर कैमरा युक्त वे-ब्रिज लगाए गए हैं ताकि निकलने वाले खनिज की सटीक मात्रा दर्ज हो सके। सबसे महत्वपूर्ण कदम खनिजों का परिवहन करने वाले वाहनों पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) माइन टैग लगाना है। अब तक प्रदेश के 1.53 लाख से अधिक वाहनों पर ये डिजिटल टैग लगाए जा चुके हैं, जिससे खनिज ले जा रहे वाहनों की ऑनलाइन ट्रैकिंग संभव हो गई है।
लखनऊ स्थित कमांड सेंटर से प्रदेशभर पर नजर
पूरी निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लखनऊ में एक अत्याधुनिक ‘कमांड सेंटर’ स्थापित किया गया है। प्रदेश के विभिन्न राजमार्गों पर आईओटी (IoT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित मानव रहित स्वचालित चेकगेट लगाए गए हैं, जो सीधे इस कमांड सेंटर से जुड़े हैं। वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में 62 ऐसे चेकगेट पूरी तरह सक्रिय हैं, जबकि दो नए गेटों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। कमांड सेंटर में तैनात ‘डिसीजन सपोर्ट सिस्टम’ (DSS) पल-पल की जानकारी जुटाता है और कहीं भी संदिग्ध गतिविधि दिखने पर संबंधित जिले के अधिकारियों को तुरंत सचेत करता है।
ई-नोटिस की मार और करोड़ों की राजस्व वसूली
योगी सरकार की नई खनन नीति 2017 के तहत लागू इस निगरानी तंत्र ने कर चोरी करने वालों और अवैध खनन माफियाओं की कमर तोड़ दी है। 16 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, इस सिस्टम के माध्यम से नियमों का उल्लंघन करने वालों को 2.41 लाख से अधिक ई-नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इन नोटिसों के जरिए कुल 998 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी निर्धारित की गई थी। विभाग की मुस्तैदी का ही परिणाम है कि इसमें से अब तक 756 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सरकारी खजाने में जमा कराई जा चुकी है। ‘एम-चेक’ ऐप की सहायता से फील्ड अधिकारियों के लिए वाहनों की जांच करना अब बेहद सरल और सटीक हो गया है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश लगभग खत्म हो गई है।
पारदर्शिता और सुशासन का नया मॉडल
राज्य सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित यह व्यवस्था न केवल अवैध खनन पर लगाम लगा रही है, बल्कि उद्योगों को एक समान और पारदर्शी प्रतिस्पर्धा का माहौल भी प्रदान कर रही है। स्वचालित चेकगेट और आरएफआईडी तकनीक ने मानवीय हस्तक्षेप को कम कर दिया है, जिससे ट्रकों की आवाजाही में लगने वाला समय भी कम हुआ है और वसूली की प्रक्रिया भी तेज हुई है। योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार, आने वाले समय में इस प्रणाली को और अधिक उन्नत बनाया जाएगा ताकि उत्तर प्रदेश का खनन क्षेत्र देश के लिए सुशासन और राजस्व प्रबंधन का एक रोल मॉडल बन सके। फिलहाल, इस तकनीकी सख्ती से खनन माफियाओं के बीच हड़कंप मचा हुआ है।