US: डोनल्ड ट्रंप पर हमले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी खामियां उजागर – The Hill News

US: डोनल्ड ट्रंप पर हमले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी खामियां उजागर

वॉशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पर साल 2024 में हुए जानलेवा हमले को लेकर एक सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आई है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के इंस्पेक्टर जनरल कार्यालय द्वारा जारी इस रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था की उन गंभीर चूकों का विवरण दिया गया है, जिनके कारण हमलावर डोनल्ड ट्रंप के बेहद करीब पहुंचने में सफल रहा। रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा के लिए जिम्मेदार ‘यूएस सीक्रेट सर्विस’ और स्थानीय पुलिस के बीच संचार और समन्वय की भारी कमी इस हमले की मुख्य वजह बनी।

पेंसिल्वेनिया के बटलर में जुलाई 2024 को आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान हुई इस घटना ने पूरी दुनिया को चौंका दिया था। अब जांच रिपोर्ट से पता चला है कि अगर एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर होता, तो इस हमले को समय रहते रोका जा सकता था।

102 रेडियो संदेशों को नहीं सुन सकी सीक्रेट सर्विस
रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा संचार व्यवस्था को लेकर हुआ है। स्थानीय कानून प्रवर्तन अधिकारी रेडियो पर लगातार एक संदिग्ध व्यक्ति के बारे में जानकारी साझा कर रहे थे, जिसकी पहचान बाद में 20 वर्षीय थॉमस क्रूक्स के रूप में हुई। स्थानीय पुलिस ने रेडियो पर कुल 102 संदेश प्रसारित किए थे, जिनमें संदिग्ध की संदिग्ध गतिविधियों के बारे में अलर्ट दिया जा रहा था। हालांकि, सीक्रेट सर्विस ने स्थानीय पुलिस के साथ कोई ‘जॉइंट कम्युनिकेशन रूम’ (साझा संचार केंद्र) स्थापित नहीं किया था, जिसके चलते वे इन महत्वपूर्ण संदेशों को सुनने में असमर्थ रहे।

सीक्रेट सर्विस इन रेडियो संचारों से पूरी तरह कटी हुई थी। रेडियो संदेशों के बजाय, एजेंसी को थॉमस क्रूक्स के बारे में केवल पांच फोन कॉल और तीन टेक्स्ट मैसेज के माध्यम से जानकारी मिली थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस विफलता के कारण सीक्रेट सर्विस के सदस्य डोनल्ड ट्रंप की व्यक्तिगत सुरक्षा टीम को संदिग्ध व्यक्ति के बारे में समय पर चेतावनी नहीं दे पाए।

हमले का घटनाक्रम
13 जुलाई 2024 को जब डोनल्ड ट्रंप रैली में समर्थकों को संबोधित कर रहे थे, तब थॉमस क्रूक्स पास की एक इमारत की छत पर चढ़ गया। वहां से उसने डोनल्ड ट्रंप पर सीधा निशाना साधते हुए फायरिंग की। इस हमले में एक गोली डोनल्ड ट्रंप के कान को छूकर निकल गई, जिससे वे घायल हो गए। इस गोलीबारी में रैली देखने आए एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए। मौके पर मौजूद सुरक्षा अधिकारियों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए थॉमस क्रूक्स को मार गिराया।

ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम की नाकामी
जांचकर्ताओं ने सुरक्षा के तकनीकी पहलुओं में भी बड़ी लापरवाही उजागर की है। रिपोर्ट के अनुसार, गोलीबारी शुरू होने से कुछ घंटे पहले थॉमस क्रूक्स ने रैली स्थल के ऊपर करीब नौ मिनट तक अपना ड्रोन उड़ाया था। सीक्रेट सर्विस का ‘काउंटर-ड्रोन सिस्टम’ उस समय तकनीकी खराबी के कारण काम नहीं कर रहा था, जिसकी वजह से ड्रोन का पता नहीं चल सका।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस प्रणाली के संचालन की जिम्मेदारी केवल एक अधिकारी पर थी, जिसने कार्यक्रम शुरू होने से पहले उपकरण का परीक्षण नहीं किया था। जब खराबी का पता चला, तो उसे ठीक करने में कई घंटे लग गए। इसी समय का फायदा उठाकर हमलावर ने बिना किसी बाधा के ड्रोन से पूरे इलाके की रेकी कर ली।

सुरक्षा रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष: सीक्रेट सर्विस की विफलता

  • साझा संचार का अभाव: स्थानीय पुलिस और सीक्रेट सर्विस के बीच कोई कॉमन कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म नहीं था।

  • अनसुने मैसेज: हमलावर थॉमस क्रूक्स के बारे में स्थानीय पुलिस द्वारा भेजे गए 102 रेडियो मैसेज सीक्रेट सर्विस तक नहीं पहुंचे।

  • तकनीकी लापरवाही: काउंटर-ड्रोन सिस्टम का फेल होना और उसका पहले से परीक्षण न किया जाना।

  • निगरानी में चूक: हमलावर ने 9 मिनट तक ड्रोन उड़ाया, लेकिन एजेंसियां बेखबर रहीं।

  • अलर्ट में देरी: संदिग्ध के बारे में सीमित जानकारी मिलने के बावजूद सुरक्षा टीम को समय पर सतर्क नहीं किया गया।

इस विस्तृत रिपोर्ट के सामने आने के बाद सीक्रेट सर्विस की कार्यप्रणाली और रणनीतिक योजना पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह स्पष्ट है कि तकनीकी और मानवीय स्तर पर हुई इन चूकों ने एक बड़ी सुरक्षा त्रासदी को जन्म दिया।

 

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