नई दिल्ली। भारत ने स्पष्ट किया है कि बांग्लादेश के साथ उसकी विकास परियोजनाओं का ढांचा दोनों देशों के बीच आपसी सहमति से तैयार रोडमैप पर टिका है। नई दिल्ली ने जोर देकर कहा है कि तीस्ता नदी से जुड़ी परियोजनाओं को लेकर भारत अपनी रणनीति तैयार करते समय क्षेत्र में हो रही सभी गतिविधियों और घटनाक्रमों का बारीकी से संज्ञान लेगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने तीस्ता नदी के प्रबंधन को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। दरअसल, यह सवाल बांग्लादेश की राजधानी ढाका और चीन के बीजिंग के बीच ‘तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना’ (टीआरसीएमआरपी) को लेकर हो रही हालिया चर्चाओं के संदर्भ में था। तीस्ता नदी के प्रबंधन में चीन की बढ़ती भागीदारी अपनी रणनीतिक अहमियत के कारण भारत और बांग्लादेश के आपसी रिश्तों में जटिलता पैदा कर सकती है।
तीस्ता नदी की रणनीतिक अहमियत
तीस्ता नदी न केवल भारत और बांग्लादेश के बीच जल बंटवारे का मुद्दा है, बल्कि यह सामरिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत संवेदनशील है। इसके महत्व को नीचे दिए गए बिंदुओं से समझा जा सकता है:
-
नदी का मार्ग: तीस्ता पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से गुजरती हुई बांग्लादेश में प्रवेश करती है। यह करोड़ों लोगों की सिंचाई और आजीविका का मुख्य आधार है।
-
सिलीगुड़ी कॉरिडोर: तीस्ता नदी का बेसिन भारत के ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ के करीब स्थित है। इसे ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है। यह मात्र 22 किलोमीटर चौड़ी पट्टी है जो मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ती है।
-
सुरक्षा का पहलू: इस क्षेत्र में चीन की किसी भी प्रकार की मौजूदगी भारत की क्षेत्रीय अखंडता और सैन्य सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
चीनी दखल पर भारत का रुख
रणधीर जायसवाल ने तीस्ता नदी के अलावा बांग्लादेश के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मोंगला पोर्ट के आधुनिकीकरण और चीन से फाइटर जेट खरीदने की बांग्लादेश की योजनाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत इन सभी मुद्दों पर पैनी नजर रखता है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जो भी उचित कदम जरूरी समझे जाते हैं, वे उठाए जाते हैं। तीस्ता प्रोजेक्ट पर भारत अपनी स्थिति और रणनीति से पहले ही बांग्लादेशी पक्ष को अवगत करा चुका है।
चीन और बांग्लादेश के बीच बढ़ता सहयोग
बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने हाल ही में चीन और बांग्लादेश के संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के बाद दोनों देशों के रिश्ते अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। उनके मुताबिक चीन ने तीस्ता नदी परियोजना के लिए अपना समर्थन देने का वादा किया है और दोनों देश इस प्रोजेक्ट के ‘फीजिबिलिटी स्टडी’ (व्यवहार्यता अध्ययन) को जल्द पूरा करने पर सहमत हुए हैं।
मुख्य विकास परियोजनाएं और चीनी निवेश
| परियोजना | विवरण |
| तीस्ता नदी प्रोजेक्ट (TRCMRP) | नदी के प्रबंधन और बहाली के लिए चीन तकनीकी और वित्तीय सहायता देने को तैयार है। |
| मोंगला पोर्ट | इस रणनीतिक बंदरगाह का आधुनिकीकरण और विस्तार चीन के सहयोग से किया जाएगा। |
| औद्योगिक जोन | चट्टोग्राम में चीनी आर्थिक और औद्योगिक जोन के विकास कार्य में तेजी लाई जाएगी। |
| रक्षा सहयोग | बांग्लादेश द्वारा चीन से फाइटर जेट खरीदने की योजना पर भी चर्चा जारी है। |
भारत के लिए पड़ोसी देशों में चीन का बढ़ता प्रभाव, विशेषकर उन परियोजनाओं में जो भारतीय सीमा के करीब हैं, एक गंभीर विषय है। रणधीर जायसवाल की सधी हुई प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि भारत तीस्ता नदी को लेकर अपनी रणनीति में सुरक्षा और विकास के सभी पहलुओं को ध्यान में रखेगा। भारत का स्पष्ट मानना है कि विकास परियोजनाओं में सहयोग आपसी रोडमैप पर आधारित होना चाहिए, जिसमें क्षेत्रीय स्थिरता का भी ध्यान रखा जाए।
Pls read:Bangladesh: दिल्ली एयरपोर्ट पर बांग्लादेशी सलाहकार को रोकने पर ढाका ने भारतीय राजनयिक को किया तलब