शिमला। हिमाचल प्रदेश में खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। विभाग द्वारा जारी अंतिम विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार, देसी घी, सरसों तेल और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से मिलने वाले दलिया सहित चार प्रमुख खाद्य पदार्थों के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। ये नमूने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन करते पाए गए हैं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, दो प्रकार के देसी घी के नमूनों को ‘सबस्टैंडर्ड’ और ‘मिसब्रांडेड’ पाया गया है। इसके अलावा, एक अन्य ब्रांड का देसी घी सबस्टैंडर्ड मिला है, जबकि सरसों तेल और पीडीएस के तहत बांटे जाने वाले दलिया को ‘मिसब्रांडेड’ घोषित किया गया है। विभाग ने इन चारों मामलों में संज्ञान लेते हुए संबंधित कारोबारियों को कानूनी नोटिस जारी कर दिया है।
अधिकारियों द्वारा की गई सैंपलिंग और जांच
यह कार्रवाई स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग, नाहन द्वारा की गई है, जिसकी रिपोर्ट संयुक्त आयुक्त-सह-निदेशक, शिमला को भेजी गई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रियंका कश्यप ने विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर इन खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्रित किए थे। इन नमूनों का विश्लेषण सीटीएल कंडाघाट सोलन में खाद्य विश्लेषक रिपु दमन कुमार द्वारा किया गया। प्रयोगशाला की जांच में चारों नमूनों में अलग-अलग खामियां पाई गईं।
नमूनों में पाई गई खामियों का विवरण
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हिम भोग दलिया (पीडीएस): पांवटा साहिब के खोड़री-माजरी क्षेत्र से 19 फरवरी 2026 को लिए गए इस नमूने में लेबलिंग की बड़ी खामी मिली। पैकेट पर ‘कंज्यूमर केयर’ (उपभोक्ता शिकायत) से संबंधित अनिवार्य जानकारी दर्ज नहीं थी, जो नियमों का उल्लंघन है। इस कारण इसे ‘मिसब्रांडेड’ की श्रेणी में रखा गया है।
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हिमाचल फ्रेश देसी घी: धौलाकुआं से 3 मार्च 2026 को लिया गया यह घी गुणवत्ता और लेबलिंग दोनों मोर्चों पर फेल रहा। जांच में इसकी ब्यूट्रो-रिफ्रैक्टोमीटर रीडिंग 52.32 पाई गई (मानक: 40-44), आयोडीन वैल्यू 79.02 मिली (मानक: 25-38), और रीशर्ट माइस्ल वैल्यू मात्र 3.34 रही (मानक: कम से कम 24)। इसके अलावा उत्पाद की निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट भी स्पष्ट नहीं थी।
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तुलसी मस्टर्ड ऑयल (सरसों तेल): इसी दिन धौलाकुआं से लिए गए सरसों तेल के नमूने में रासायनिक मानक तो सही मिले, लेकिन लेबल पर प्रति यूनिट बिक्री मूल्य अंकित नहीं था। यह ‘लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट’ का उल्लंघन है, इसलिए इसे ‘मिसब्रांडेड’ माना गया।
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दयाल प्योर देसी घी: माजरा से 11 मार्च 2026 को लिए गए इस घी के नमूने में भी गंभीर मिलावट के संकेत मिले। इसकी ब्यूट्रो-रिफ्रैक्टोमीटर रीडिंग 50.0 और रीशर्ट माइस्ल वैल्यू केवल 0.43 दर्ज की गई। रिपोर्ट में इसे ‘सबस्टैंडर्ड’ घोषित किया गया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले विक्रेताओं और उत्पादकों को बख्शा नहीं जाएगा। विभाग ने कहा है कि पूरे राज्य में खाद्य सामग्री की नियमित जांच और सैंपलिंग का अभियान भविष्य में और तेज किया जाएगा ताकि बाजार में केवल गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित सामान ही उपलब्ध हो। फिलहाल, जिन चार कंपनियों के नमूने फेल हुए हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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