शिमला। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के कर्मचारियों द्वारा घोषित चक्का जाम और हड़ताल को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। उप मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने शिमला में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान दोटूक शब्दों में कहा कि यह हड़ताल पूरी तरह से अवैध है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारी अपनी जिद पर अड़े रहते हैं और जनता को असुविधा होती है, तो सरकार ‘आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम’ (एस्मा) के तहत कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।
मुकेश अग्निहोत्री ने तल्ख लहजे में कहा कि अगर कर्मचारी बसें नहीं चलाना चाहते, तो वे अपनी मर्जी से बसों की चाबियां सरकार को सौंप सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के कई रास्ते हैं, लेकिन चक्का जाम करके आम जनता को बंधक बनाना कतई स्वीकार्य नहीं है।
संवाद और वित्तीय जिम्मेदारियां
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल सरकार ने एचआरटीसी के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के प्रति अपनी सभी जिम्मेदारियों को समय पर पूरा किया है। उन्होंने बताया कि हर महीने वेतन और पेंशन का भुगतान बिना किसी देरी के किया जा रहा है। जून महीने का वेतन भी पहली तारीख को ही जारी कर दिया गया था। अग्निहोत्री के अनुसार, जब सरकार वित्तीय लाभ समय पर दे रही है, तो ऐसे में हड़ताल का कोई तर्क नहीं बनता। उन्होंने प्रदेश की जनता से अपील की कि वे स्वयं विचार करें कि क्या ऐसी स्थिति में चक्का जाम करना उचित है।
बैठक बेनतीजा रहने का कारण
मंगलवार को कर्मचारी यूनियन और प्रशासन के बीच हुई वार्ता विफल होने पर मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि कर्मचारी नेता मुख्य रूप से एक तबादले के मुद्दे पर अड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि बैठक में वित्तीय मांगों पर गंभीरता से चर्चा करने के बजाय एक स्थानांतरण को मुद्दा बनाया गया, जो अनुचित है। इसके बावजूद सरकार अब भी बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी दबाव में आकर जनता के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।
एचआरटीसी: जनसेवा का माध्यम
परिवहन मंत्री ने रेखांकित किया कि एचआरटीसी का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि जनसेवा है। उन्होंने बताया कि हिमाचल में प्रतिदिन करीब पांच लाख यात्री इन बसों में सफर करते हैं। ऐसे में हड़ताल का सबसे ज्यादा बुरा असर आम नागरिक और छात्रों पर पड़ेगा। उन्होंने कर्मचारी संगठनों से राजनीतिक एजेंडे के तहत काम न करने का आग्रह किया और याद दिलाया कि साल 2016 में भी अदालत ने एचआरटीसी की ऐसी ही एक हड़ताल को गलत करार दिया था।
कर्मचारी कल्याण के लिए सरकार के उठाए कदम
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| नई बसों की खरीद | पिछले तीन वर्षों में बेड़े में 813 नई बसें जोड़ी गईं। |
| नियमितीकरण | 2198 अनुबंध कर्मचारियों को नियमित किया गया। |
| पीस मील वर्कर | 145 पीस मील वर्करों को नियमित सेवा में शामिल किया गया। |
| महंगाई भत्ता | राज्य कर्मचारियों के समान डीए का लाभ दिया जा रहा है। |
| पेंशन सुविधा | निगम में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लागू किया गया है। |
| भर्ती प्रक्रिया | कंडक्टरों की भर्ती लोक सेवा आयोग के माध्यम से निष्पक्ष तरीके से पूरी की गई। |
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि एचआरटीसी कर्मचारी निगम की रीढ़ की हड्डी हैं, लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि वे एक आवश्यक सेवा का हिस्सा हैं। सरकार ने कर्मचारियों को अनुबंध से नियमित करने और नई भर्तियों के जरिए निगम को मजबूत करने का काम किया है। उन्होंने यूनियन के नेताओं से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने और हड़ताल वापस लेने का आग्रह किया है, ताकि प्रदेश में परिवहन व्यवस्था सुचारू बनी रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की पहली प्राथमिकता प्रदेश की जनता को बिना किसी बाधा के यात्रा की सुविधा देना है।