मॉस्को। यूक्रेन के साथ चल रहे लंबे युद्ध ने रूस को अपनी दशकों पुरानी सैन्य रणनीति को बदलने पर मजबूर कर दिया है। ‘प्लैनेट लैब्स’ से प्राप्त ताजा सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, रूस ने अपने सबसे महत्वपूर्ण ‘एंगेल्स एयर बेस’ पर स्ट्रैटेजिक बॉम्बर्स (रणनीतिक बमवर्षक विमानों) की सुरक्षा के लिए विशाल शेल्टर बनाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। 20 जून तक की तस्वीरों से पता चलता है कि सारातोव इलाके में स्थित इस बेस पर कम से कम 17 बड़े सुरक्षा शेल्टरों का निर्माण किया जा रहा है।
वोल्गा नदी के किनारे स्थित एंगेल्स एयर बेस रूसी एयरोस्पेस फोर्सेज का मुख्य केंद्र है। यहाँ रूस के सबसे घातक Tu-160 ‘ब्लैकजैक’ सुपरसोनिक बॉम्बर्स और Tu-95 बॉम्बर्स का एकमात्र ऑपरेशनल रेजिमेंट तैनात है। युद्ध की शुरुआत से ही ये विमान रूसी हवाई क्षेत्र से ही यूक्रेन पर Kh-101 जैसी घातक लॉन्ग-रेंज क्रूज मिसाइलें दागते रहे हैं।
दशकों पुरानी ‘खुले में रखने’ की नीति का अंत
शीत युद्ध (कोल्ड वॉर) के समय से ही सोवियत संघ और बाद में रूस अपने लंबी दूरी के बमवर्षकों को खुले मैदानों में खड़ा रखता था। इसके पीछे मुख्य कारण अमेरिका के साथ हुई ‘स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी’ (START I) थी। इस संधि के तहत दोनों देश इस बात पर सहमत थे कि वे अपने परमाणु हथियारों को पारदर्शी रखेंगे ताकि सैटेलाइट के जरिए उनकी निगरानी की जा सके। इसके विपरीत, टैक्टिकल विमानों को हमेशा मजबूत शेल्टरों में रखा जाता था। लेकिन अब यूक्रेन के लॉन्ग-रेंज ड्रोन्स के खतरे ने रूस को अपनी इस पारंपरिक सोच को बदलने पर विवश कर दिया है।
‘ऑपरेशन स्पाइडरवेब’ ने खोली रूस की पोल
रूस के इस कदम के पीछे 1 जून 2025 को यूक्रेन द्वारा अंजाम दिया गया ‘ऑपरेशन स्पाइडरवेब’ एक मुख्य कारण माना जा रहा है। इस हमले में यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसियों ने चुपके से रूसी सीमा के भीतर ड्रोन भेजकर रणनीतिक बमवर्षकों वाले एयरबेसों को निशाना बनाया था। हमले के बाद आई सैटेलाइट तस्वीरों में कई Tu-95MS बॉम्बर्स को क्षतिग्रस्त हालत में देखा गया था। इस घटना ने साबित कर दिया कि युद्ध के मैदान से दूर होने के बावजूद ये विमान अब सुरक्षित नहीं हैं।
सीमित संसाधनों को बचाने की जद्दोजहद
रूस के लिए अपने बॉम्बर बेड़े को बचाना एक बड़ी रणनीतिक चुनौती है। वर्तमान में रूस के पास लगभग 47 Tu-95MS, 55 Tu-22M3 और 18 Tu-160 बॉम्बर हैं। इनमें से Tu-95MS और Tu-22M3 सोवियत युग के विमान हैं, जिनका उत्पादन अब बंद हो चुका है। यानी अगर एक भी विमान नष्ट होता है, तो उसे दोबारा बनाना मुमकिन नहीं है। हालांकि Tu-160 का उत्पादन जारी है, लेकिन यह इतना महंगा और जटिल विमान है कि इसे तैयार करने में कई साल लग जाते हैं।
रूस के बॉम्बर बेड़े की वर्तमान स्थिति
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Tu-95MS: 47 विमान (उत्पादन बंद, अपूरणीय क्षति)।
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Tu-22M3: 55 विमान (सोवियत युग के, उत्पादन बंद)।
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Tu-160: 18 विमान (अत्यंत जटिल और महंगे, उत्पादन जारी)।
एंगेल्स एयर बेस पर चल रहा यह निर्माण कार्य इस बात का प्रमाण है कि युद्ध अब अग्रिम मोर्चों से निकलकर सुरक्षित माने जाने वाले ठिकानों तक पहुंच गया है। रूसी वायु शक्ति और उसकी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने के लिए इन विमानों की सुरक्षा अब मॉस्को के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है। ड्रोन तकनीक के प्रसार ने हवाई युद्ध के भविष्य को बदल दिया है, जिससे रूस जैसे शक्तिशाली देश को भी अपने रक्षण के तरीकों में भारी निवेश और बदलाव करना पड़ रहा है।
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