Himachal: हिमाचल की राजनीति में मुख्यमंत्री सुक्खू और नीरज भारती के बीच छिड़ी तीखी जुबानी जंग

शिमला। हिमाचल प्रदेश में चल रहा सियासी घमासान अब व्यक्तिगत आरोपों के दौर में पहुंच गया है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू और कृषि मंत्री चंद्र कुमार के पुत्र व पूर्व विधायक नीरज भारती के बीच पैदा हुआ विवाद अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में दिए गए एक बयान, जिसमें उन्होंने ‘नशेड़ी’ शब्द का प्रयोग किया था, ने प्रदेश की राजनीति में एक नया उबाल ला दिया है। हालांकि मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लिया था, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे सीधे तौर पर नीरज भारती पर किया गया कटाक्ष माना जा रहा है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब नीरज भारती ने पिछले कुछ समय से सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। उन्होंने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से कार्यकर्ताओं की अनदेखी और उनके काम न होने के गंभीर मुद्दे उठाए थे। इन टिप्पणियों में उन्होंने सीधे तौर पर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू को निशाने पर लिया था। इस अनुशासनहीनता के बाद घटनाक्रम काफी तेजी से बदला। पहले नीरज भारती ने हिमाचल कांग्रेस के उपाध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया और इसके तुरंत बाद पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। यही नहीं, प्रशासन ने उनके इंटरनेट मीडिया अकाउंट को भी बंद करवा दिया, जिससे विवाद और गहरा गया।

मुख्यमंत्री के ‘नशेड़ी’ वाले बयान पर अब नीरज भारती ने अत्यंत तीखा पलटवार किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर ही नशा करने का आरोप लगाते हुए उन्हें ‘डोप टेस्ट’ करवाने की खुली चुनौती दे डाली है। भारती ने दावा किया कि अतीत में सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कई मौकों पर उनके साथ शराब पी है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे स्वयं अब इन चीजों को छोड़ चुके हैं और मुख्यमंत्री को भी स्वास्थ्य के लिहाज से इसे छोड़ने की सलाह दी। भारती के इस जवाबी हमले ने प्रदेश सरकार की छवि और पार्टी के भीतर के अनुशासन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच लोक निर्माण विभाग के मंत्री विक्रमादित्य सिंह की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भी चर्चाओं को गर्म कर दिया है। विक्रमादित्य सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जीवन का यह शाश्वत सत्य है कि जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदते हैं, वे अक्सर खुद उसमें गिर जाते हैं। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना नफरत और द्वेष से दूर रहने की नसीहत दी है। उन्होंने सकारात्मक सोच और निस्वार्थ भाव से सेवा करने को ही सबसे बड़ा कवच बताया है। विक्रमादित्य सिंह की इस रहस्यमयी पोस्ट को भी वर्तमान राजनीतिक द्वंद्व से जोड़कर देखा जा रहा है।

पार्टी के भीतर जारी यह खींचतान अब केवल पद और प्रतिष्ठा की लड़ाई नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक स्तर पर एक-दूसरे को नीचा दिखाने के प्रयास में बदल गई है। जहां एक ओर मुख्यमंत्री प्रशासन और संगठन में अनुशासन का हवाला दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नीरज भारती अपने निष्कासन के बाद और अधिक हमलावर हो गए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस आलाकमान इस गुटबाजी और तीखी बयानबाजी को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है, क्योंकि सरकार और संगठन के बीच की यह खाई लगातार बढ़ती जा रही है। इस विवाद ने न केवल सरकार की स्थिरता पर चर्चा छेड़ दी है बल्कि विपक्षी दलों को भी बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा थमा दिया है। फिलहाल, दोनों पक्षों की ओर से जारी तीखी बयानबाजी ने राज्य के राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है।

 

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