लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान होने वाली मौतों को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी कार्ययोजना तैयार की है। ट्रामा टास्क फोर्स की हालिया रिपोर्ट को आधार बनाते हुए सरकार ने प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे में व्यापक बदलाव का निर्णय लिया है। इस नई योजना के तहत प्रदेश में 10 नए लेवल-वन और 36 नए लेवल-दो श्रेणी के ट्रामा सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा, राष्ट्रीय और राजकीय राजमार्गों के निकट स्थित 126 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को लेवल-तीन के ट्रामा सेंटरों के रूप में अपग्रेड किया जाएगा।
दुर्घटना के शिकार व्यक्ति की जान बचाने के लिए ‘गोल्डन आवर’ (हादसे के शुरुआती 60 मिनट) का महत्व सर्वोपरि होता है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार 108, 112 और नेशनल हाईवे की एंबुलेंस सेवा 1033 को एक साझा नेटवर्क से जोड़ने जा रही है। इस पूरे तंत्र की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए लखनऊ में एक आधुनिक ‘सेंट्रल कमांड सेंटर’ स्थापित किया जाएगा। इस सेंटर के माध्यम से यह तुरंत पता लगाया जा सकेगा कि दुर्घटना स्थल के सबसे करीब कौन सा ट्रामा सेंटर है और वहां कितने बेड उपलब्ध हैं। इससे घायल को बिना समय गंवाए सही अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा।
उत्तर प्रदेश में बढ़ते एक्सप्रेसवे और वाहनों की तेज रफ्तार के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा है। हालांकि ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर जागरूकता अभियान चलाए गए, लेकिन मौत के आंकड़े अब भी चिंताजनक हैं। इसी के मद्देनजर प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत एक विशेष मॉडल तैयार किया गया है, जिसमें करीब 3,000 निजी अस्पतालों को भी इस नेटवर्क का हिस्सा बनाया जाएगा। निजी अस्पतालों में मानकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ‘साचीज’ (स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज) को सौंपी गई है।
कार्ययोजना के अनुसार, वर्तमान में केवल केजीएमयू में उपलब्ध लेवल-वन सुविधा अब पीजीआई, लोहिया संस्थान और मेरठ, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, झांसी, गोरखपुर सहित दस मेडिकल कॉलेजों में भी मिलेगी। ये 100 बेड वाले सेंटर होंगे, जिनमें 50 बेड का आईसीयू, 24 घंटे न्यूरो व आर्थो सर्जन की उपलब्धता और एमआरआई व सीटी स्कैन जैसी आधुनिक जांच सुविधाएं एक ही छत के नीचे होंगी। यहां जटिल सर्जरी के लिए मॉड्यूलर ओटी और एडवांस स्ट्रेचर की व्यवस्था होगी ताकि मरीज की गर्दन या सिर की चोट और न बढ़े।
इसी प्रकार, 36 स्वायत्त मेडिकल कॉलेजों में 100 बेड वाले लेवल-दो ट्रामा सेंटर और 126 सीएचसी में लेवल-तीन की सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। लेवल-दो केंद्रों में 25 आईसीयू बेड और हड्डी के ऑपरेशन की सुविधा होगी। वहीं लेवल-तीन केंद्रों में मरीजों को ऑक्सीजन देने, रक्तस्त्राव रोकने और प्राथमिक उपचार की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। सरकार ने प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत निजी अस्पतालों में इलाज के लिए प्रति सप्ताह एक लाख रुपये तक के भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
शास्त्री भवन में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में इस पूरे रोडमैप को अंतिम रूप दिया गया, जिसे अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के लिए भेजा गया है। सरकार की इस पहल से उम्मीद है कि राज्य के राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं के समय घायलों को समय पर उपचार मिल सकेगा और असमय होने वाली मौतों के आंकड़े को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। यह मास्टर प्लान उत्तर प्रदेश की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था में एक मील का पत्थर साबित होगा।