लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ के होटल सेंट्रम में स्वास्थ्य और आईटी विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘एआई हेल्थ समिट’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वास जताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पैटर्न की पहचान कर भविष्य में महामारियों पर प्रभावी रोक लगाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने तकनीक का बेहतर समन्वय कर हर क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है और अब एआई चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाने के लिए तैयार है।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि एआई की मदद से बीमारियों के पैटर्न का समय रहते पता लगाया जा सकेगा, जिससे किसी भी संभावित महामारी को पनपने से पहले ही रोका जा सकेगा। उन्होंने पूर्वांचल में जापानी इंसेफेलाइटिस पर मिली जीत का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार सघन निगरानी और डेटा के सही उपयोग से अब वहां बच्चों की जान नहीं जाती। पहले जहां एक हजार से ज्यादा बच्चे इस बीमारी की चपेट में आते थे, वहीं अब बेहतर सर्विलांस के कारण यह आंकड़ा शून्य के करीब पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से संवेदनशील इलाकों की पहचान करना और वहां स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना अब और भी आसान हो जाएगा।
उत्तर प्रदेश को तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के संकल्प को दोहराते हुए योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि लखनऊ को ‘एआई सिटी’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रदेश में एआई मिशन के लिए तीन हजार करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है और इसके अंतर्गत सात ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब दुनिया को तकनीक आधारित स्वास्थ्य मॉडल देने की स्थिति में है। इसके साथ ही प्रदेश में डेटा सेंटर का एक बड़ा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य ढांचे में हुए सुधारों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में मात्र 40 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर 81 हो गई है। प्रदेश में दो एम्स भी पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार अब ‘स्केल से स्किल’ और ‘स्किल से स्पीड’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में आईसीयू बेड की संख्या बढ़ाई गई है और टेलीमेडिसिन सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप मातृ और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
योगी आदित्यनाथ ने जानकारी दी कि गौतम बुद्ध नगर में ‘एआई एंड इनोवेशन ड्रिवन एंटरप्रेन्योरशिप सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ और लखनऊ के एसजीपीजीआई में ‘मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का कार्य प्रगति पर है। इसके साथ ही मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क के निर्माण का कार्य भी युद्धस्तर पर चल रहा है। उन्होंने कहा कि जब अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का भरोसा सरकार पर मजबूत होता है, तभी योजनाएं धरातल पर सफल होती हैं।
इस दो दिवसीय समिट में दुनियाभर के विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं, जो कैंसर, टीबी स्क्रीनिंग, रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी जैसी जटिल बीमारियों में एआई के सटीक और त्वरित परिणामों पर प्रजेंटेशन देंगे। समिट में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और डेटा गवर्नेंस जैसे विषयों पर विस्तृत मंथन होगा। एआई आधारित हेल्थ स्टार्टअप्स और उत्तर प्रदेश में चल रहे पायलट प्रोजेक्ट्स का लाइव प्रदर्शन भी इस आयोजन का मुख्य आकर्षण है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के प्रयोग से जांच से लेकर इलाज तक की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी, जिससे उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य नवाचार का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।
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