लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के आगाज से पहले ही राज्य की सियासत में उबाल आ गया है। मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने सरकार को घेरने के लिए अपनी रणनीति पूरी तरह तैयार कर ली है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को पार्टी मुख्यालय में विधायकों के साथ एक लंबी और महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि इस बार सदन में केवल बजट पर चर्चा नहीं होगी, बल्कि सरकार की विफलताओं का कच्चा चिट्ठा खोला जाएगा। अखिलेश यादव ने अपने विधायकों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे महंगाई, बेरोजगारी और ध्वस्त होती कानून व्यवस्था जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को कोई रियायत न दें और पूरी आक्रामकता के साथ जनता की आवाज बुलंद करें।
अखिलेश यादव ने बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सुझाव अपने विधायकों को दिया। उन्होंने कहा कि इससे पहले कि भारतीय जनता पार्टी के नेता नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की उपलब्धियों का गुणगान शुरू करें, विपक्ष को उनसे पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट का पूरा हिसाब मांगना चाहिए। अखिलेश यादव का तर्क है कि सरकार हर साल लुभावने बजट पेश करती है, लेकिन उन योजनाओं का पैसा वास्तव में कहाँ खर्च हुआ, इसका कोई अता-पता नहीं होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि आम जनता को भी अब यह हिसाब मांगना चाहिए कि उनकी गाढ़ी कमाई का पैसा धरातल पर विकास कार्यों में लगा या केवल कागजों तक ही सीमित रहा।
आगामी चुनावों को देखते हुए सपा प्रमुख ने अपने विधायकों में नया जोश भरने का प्रयास किया। उन्होंने भाजपा की नीतियों से पूरी तरह सतर्क रहने की हिदायत देते हुए कहा कि 2027 का विधानसभा चुनाव अब बहुत नजदीक है। उन्होंने पार्टी के सभी सदस्यों से आह्वान किया कि वे ‘करो या मरो’ की भावना के साथ मैदान में उतरें और प्रदेश में समाजवादी सरकार बनाने का रास्ता साफ करें। अखिलेश यादव के अनुसार, भाजपा सरकार की कार्यशैली जनविरोधी है और वे केवल ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की बढ़ती ताकत से घबराए हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि पीडीए का यह नया सामाजिक समीकरण ही भाजपा के राजनीतिक पतन का कारण बनेगा।
भाजपा सरकार पर वैचारिक प्रहार करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि वर्तमान सत्ताधारी दल सौ प्रतिशत असत्य के मार्ग पर चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का स्वस्थ लोकतांत्रिक राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। उनके अनुसार, भाजपा सरकार विकास के नाम पर केवल जनता के साथ छलावा कर रही है। उन्होंने एक रोचक उपमा देते हुए कहा कि सरकार बच्चों को चॉकलेट दिखाकर और बड़ों को झुनझुना पकड़ाकर बहलाने की कोशिश कर रही है, जबकि वास्तविक समस्याएं जैसे गरीबी और भ्रष्टाचार निरंतर बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ी राजनीतिक आशंका भी व्यक्त की कि सरकार अपनी हार के डर से ग्राम प्रधानी के चुनावों को अनिश्चितकाल के लिए टालने की साजिश रच सकती है।
आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए अखिलेश यादव ने भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया व्यापारिक समझौते की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस समझौते को ‘डील’ के बजाय भाजपा की ‘ढील’ करार दिया। सपा अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि इस समझौते के कारण भारतीय कृषि क्षेत्र को अपूरणीय क्षति होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अमेरिका से गाय का दूध और शहद जैसे उत्पाद भारतीय बाजारों में बिना किसी रोक-टोक के आने लगेंगे, तो भारत के स्थानीय दुग्ध उत्पादक और किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे। उनके अनुसार, यह नीति भारतीय बाजार को विदेशी कंपनियों के हवाले करने जैसी है, जिससे छोटे किसान और लघु-मध्यम उद्योग (एमएसएमई) गहरे संकट में घिर जाएंगे। इसका अंतिम असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जिनकी आर्थिक मुश्किलें और अधिक बढ़ेंगी।
प्रदेश की आंतरिक स्थिति पर चर्चा करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था का नामोनिशान नहीं बचा है। अपराधी बेखौफ हैं और आम नागरिक भय के साए में जीने को मजबूर है। उन्होंने रियल एस्टेट क्षेत्र में बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार ने जमीनों की वैल्यू बढ़ाकर आम आदमी के लिए घर बनाना भी दूभर कर दिया है। अखिलेश यादव का मानना है कि यह वर्तमान सरकार का आखिरी पूर्ण बजट है और उन्हें प्रदेश की जनता को कोई भी वास्तविक राहत देने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा को न तो सड़कों पर भटकते बेरोजगार नौजवान की फिक्र है और न ही कर्ज के बोझ तले दबे किसान की।
बैठक के समापन पर अखिलेश यादव ने विधायकों को एकजुट रहने और सदन के भीतर अनुशासित रहते हुए अपनी बात मजबूती से रखने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी जनता के हितों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक निरंतर संघर्ष करेगी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने दोहराया कि सपा के विधायक भ्रष्टाचार और महिलाओं की सुरक्षा जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार से सीधी जवाबदेही मांगेंगे। अखिलेश यादव के इन तेवरों ने यह साफ कर दिया है कि सोमवार से शुरू होने वाला बजट सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है और विपक्ष सरकार के हर दावे की सघन समीक्षा करने के मूड में है। समाजवादी पार्टी अब पूरी तरह चुनावी मुद्रा में है और उसकी नजर 2027 की सत्ता पर टिकी है।
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