शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विधायकों की प्राथमिकताओं को निर्धारित करने हेतु आयोजित दो दिवसीय बैठक के अंतिम दिन शिमला और कांगड़ा जिले के जनप्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में राज्य के भविष्य की रूपरेखा तैयार करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार का मुख्य ध्यान स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यटन, ऊर्जा और डेटा स्टोरेज जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जमीनी स्तर पर सुधार किए जा रहे हैं और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि हिमाचल प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसने दूध के साथ-साथ प्राकृतिक रूप से उगाए गए गेहूं, मक्का, जौ और हल्दी पर सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रदान किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस क्रांतिकारी कदम से ग्रामीण निवासियों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आएगा और खेती-किसानी से जुड़े लोगों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को राज्य की प्रगति की धुरी बताते हुए उन्होंने कहा कि जब तक गांव सशक्त नहीं होंगे, प्रदेश का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने एक हालिया राष्ट्रीय सर्वेक्षण का हवाला दिया। उन्होंने गर्व के साथ जानकारी साझा की कि हिमाचल प्रदेश ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के मामले में लंबी छलांग लगाई है। साल 2021 में जो प्रदेश 21वें स्थान पर था, वह अब 16 राज्यों को पीछे छोड़ते हुए देश भर में 5वें स्थान पर पहुँच गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक से लैस करने की दिशा में सरकार तेजी से बढ़ रही है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि चमियाणा और टांडा मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू कर दी गई है और जल्द ही राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को यह अत्याधुनिक उपचार मिलने लगेगा।
प्रशासनिक और डिजिटल सुधारों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत सरकार के ‘बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान-2024’ के तहत हिमाचल को ‘टॉप अचीवर स्टेट’ के रूप में मान्यता मिली है। यह निवेशकों के अनुकूल बनाई गई नीतियों का परिणाम है। इसके अतिरिक्त, सरकारी कामकाज में ई-फाइलिंग और डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए राज्य को ‘पीपुल फर्स्ट इंटीग्रेशन अवार्ड’ से भी नवाजा गया है। मुख्यमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के सहयोग से तैयार 2025 की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि हिमाचल का मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) 0.78 है, जो राष्ट्रीय औसत 0.63 से काफी अधिक है। यह दर्शाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सही नीतियों और जनभागीदारी से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
बैठक के दौरान शिमला जिले के विधायकों ने अपनी प्राथमिकताएं रखीं। रोहड़ू के विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने दूध के समर्थन मूल्य में वृद्धि और सेब की रिकॉर्ड खरीद के लिए सरकार का आभार जताया। उन्होंने सीमा कॉलेज में बी.एड कक्षाएं शुरू करने और पेयजल योजनाओं को शीघ्र पूरा करने की मांग की। शिमला शहरी के विधायक हरीश जनार्था ने शहर की लिंक सड़कों के रखरखाव के लिए अलग बजट, पेयजल आपूर्ति में तेजी और भूमिगत डक्टिंग कार्य को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया। उन्होंने शहर के सौंदर्यीकरण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की।
कांगड़ा जिले के जनप्रतिनिधियों ने भी अपने क्षेत्रों की समस्याओं और विकास की मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। नूरपुर के विधायक रणबीर निक्का ने मातृ एवं शिशु अस्पताल के निर्माण और नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों के रिक्त पदों को भरने पर जोर दिया। उन्होंने पंजाब सीमा के पास अवैध खनन रोकने के लिए सीमांकन की मांग की। इंदौरा के विधायक मलेंद्र राजन ने मानसून के दौरान आई बाढ़ से हुए नुकसान के मुआवजे और क्षेत्र के चैनलाइजेशन की आवश्यकता बताई। उन्होंने गन्ने के किसानों के लिए विशेष नीति बनाने और चीनी मिल स्थापित करने का भी सुझाव दिया।
जसवां-परागपुर के विधायक विक्रम सिंह ने रक्कड़-शांतला सड़क को केंद्रीय योजना में शामिल करने और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सुधारने की मांग की। ज्वालामुखी के विधायक संजय रतन ने क्षेत्र में हेलीपोर्ट के निर्माण, पॉलिटेक्निक या आईटीआई की स्थापना और आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए अतिरिक्त धन की मांग रखी। सुलाह के विधायक विपिन सिंह परमार ने बैर खड्ड पर निर्माणाधीन पुलों और विभिन्न सरकारी भवनों के काम में तेजी लाने का आग्रह किया।
कांगड़ा के विधायक पवन काजल ने शिक्षा की गुणवत्ता और पारंपरिक सिंचाई कूहलों की स्थिति सुधारने का मुद्दा उठाया। पालमपुर के विधायक आशीष बटैल ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार का धन्यवाद किया, लेकिन नगर निगम क्षेत्र में बढ़े हुए पानी के बिलों का मुद्दा भी उठाया। बैजनाथ के विधायक किशोरी लाल ने होली-उतराला मार्ग के निर्माण और बैजनाथ डिपो के लिए नई बसों की व्यवस्था करने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों से आग्रह किया कि वे अपनी प्राथमिकताओं को निर्धारित प्रारूप में जल्द से जल्द योजना विभाग को सौंप दें ताकि उन्हें 2026-27 के बजट में शामिल किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विधायकों द्वारा उठाए गए मसलों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए। अंत में उन्होंने ‘चिट्टा मुक्त हिमाचल’ अभियान को सफल बनाने के लिए सभी से सहयोग मांगा। इस अवसर पर कृषि मंत्री चौधरी चंद्र कुमार, आयुष मंत्री यादविंदर गोमा और मुख्य सचिव संजय गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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